समृद्धि योजना 2026: एससी/एसटी स्टार्टअप्स के लिए ₹2 लाख सीड मनी
आधिकारिक myScheme रिकॉर्ड से जांचा गया Read in English
संक्षेप में
एआईसीटीई की समृद्धि योजना तकनीकी संस्थानों को ₹20,00,000 का अनुदान देती है ताकि एससी और एसटी छात्रों के उद्यमों को बढ़ावा दिया जा सके। चयनित संस्थान अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों के नौ पंजीकृत स्टार्टअप्स को ₹2,00,000 की गैर-वापसी योग्य सीड राशि प्रदान करता है। पात्र तकनीकी संस्थान एआईसीटीई एक्यूआईएस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
एक नज़र में
| मंत्रालय / विभाग | Ministry of Education |
| स्तर | केंद्र सरकार |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन |
लाभ
- प्रत्येक चयनित स्टार्टअप को ₹2,00,000 की गैर-वापसी योग्य सीड राशि दी जाती है।
- संस्थान को 2 वर्ष की अवधि के लिए कुल ₹20,00,000 की वित्तीय सहायता मिलती है।
- एससी/एसटी वर्ग के छात्रों के नौ पंजीकृत स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग निर्धारित है।
- चयन प्रक्रिया के खर्चों को पूरा करने के लिए संस्थान को ₹2,00,000 दिए जाते हैं।
- संस्थान को लगातार दो वर्षों तक प्रति वर्ष ₹1,00,000 का आवर्ती अनुदान प्राप्त होता है।
- योजना स्वीकृत होने के समय ही 100% गैर-आवर्ती निधि जारी कर दी जाती है।
कौन आवेदन कर सकता है (पात्रता)
- छात्र आवेदक अनुसूचित जाति (एससी) या अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से होना चाहिए।
- छात्र डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत हो या उसी संस्थान से उत्तीर्ण हो चुका हो।
- छात्र के नाम पर एक पंजीकृत कंपनी या स्टार्टअप होना अनिवार्य है।
- आवेदन करने वाला संस्थान एआईसीटीई द्वारा अनुमोदित होना चाहिए।
- संस्थान या विश्वविद्यालय विभाग कम से कम 10 वर्षों से अस्तित्व में होना चाहिए।
- संस्थान में कम से कम 5 वर्षों से सक्रिय इन्क्यूबेशन केंद्र होना चाहिए।
- संस्थान में पिछले 3 वर्षों के दौरान औसतन न्यूनतम 50 एससी/एसटी छात्र नामांकित होने चाहिए।
- संस्थान को केंद्र सरकार की टीएसपी और एससीएसपी गाइडलाइंस का पालन करना आवश्यक है।
जरूरी दस्तावेज
- एआईसीटीई अनुमोदन और चालू वर्ष के अप्रूवल विस्तार पत्र का प्रमाण।
- संस्थान के कम से कम 10 वर्ष पुराने होने का दस्तावेजी साक्ष्य।
- इन्क्यूबेशन केंद्र और उसकी 5 वर्षों की गतिविधियों के रिकॉर्ड।
- पिछले 3 वर्षों में औसतन 50 एससी/एसटी छात्रों के नामांकन का प्रमाण।
- जनजातीय उप-योजना और अनुसूचित जाति उप-योजना अनुपालन दस्तावेज।
- संस्थान का पैन कार्ड और सत्यापित बैंक खाते का विवरण।
- संस्थान के समन्वयक का 12 अंकों का आधार कार्ड और 10 अंकों का पैन कार्ड।
- छात्र के अंतिम वर्ष के अध्ययन या उसी संस्थान से उत्तीर्ण होने का प्रमाण।
- छात्र के नाम पर पंजीकृत स्टार्टअप या कंपनी का पंजीकरण प्रमाण पत्र।
- प्रस्तावित स्टार्टअप्स और बजट अनुमानों का विवरण।
आवेदन कैसे करें
- 1आधिकारिक एआईसीटीई पोर्टल पर संस्थान के क्रेडेंशियल्स से लॉग इन करें और एक्यूआईएस एप्लिकेशन टैब खोलें।
- 2संस्थान के पहले से भरे विवरण जांचें और जिला, पैन तथा ईमेल जैसी शेष जानकारी दर्ज करें।
- 3संस्थान का बैंक विवरण भरें, उसे सेव करें और कन्फर्म करके आगे की प्रक्रिया अनलॉक करें।
- 4न्यू बटन दबाकर नया आवेदन बनाएं और ड्रॉपडाउन से समृद्धि योजना का चयन करें।
- 5मुख्य अन्वेषक के विवरण जैसे फैकल्टी आईडी, आधार, पैन और परियोजना सारांश दर्ज करें।
- 6बजट अनुमान और प्रस्तावित एससी/एसटी स्टार्टअप्स का विवरण संबंधित टैब में भरें।
- 7सभी जानकारी भरने के बाद एक्यूआईएस टैब पर जाकर वैलिडेट एप्लिकेशन पर क्लिक करें और आवेदन जमा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
समृद्धि योजना में प्रत्येक छात्र स्टार्टअप को कितनी सीड मनी मिलती है?+
प्रत्येक चयनित एससी/एसटी छात्र स्टार्टअप को ₹2,00,000 की गैर-वापसी योग्य सीड राशि दी जाती है।
एक संस्थान द्वारा कितने स्टार्टअप चुने जाते हैं?+
संस्थान की आंतरिक समिति द्वारा एससी/एसटी छात्रों के ठीक नौ पंजीकृत स्टार्टअप चुने जाते हैं।
क्या अन्य सरकारी योजनाओं से सहायता प्राप्त स्टार्टअप पात्र हैं?+
नहीं, जो स्टार्टअप पहले से एआईसीटीई या केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं से लाभान्वित हैं, वे अपात्र हैं।
संस्थान को कुल कितनी वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है?+
संस्थान को 2 वर्ष की अवधि के लिए कुल ₹20,00,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है।
आवेदन करने वाले संस्थान का कितना पुराना होना जरूरी है?+
आवेदन करने वाले तकनीकी संस्थान या विश्वविद्यालय विभाग का कम से कम 10 वर्ष पुराना होना आवश्यक है।
इन्क्यूबेशन केंद्र के संबंध में क्या नियम हैं?+
संस्थान में एक अच्छा इन्क्यूबेशन केंद्र होना चाहिए जिसकी गतिविधियां कम से कम 5 वर्षों से चल रही हों।
NaukriZila सरकारी वेबसाइट नहीं है। केवल आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करें; सरकारी योजना के लिए किसी को पैसे न दें। स्रोत: myScheme (Government of India)