दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति (NOS-SWD)
आधिकारिक myScheme रिकॉर्ड से जांचा गया Read in English
संक्षेप में
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना विदेश के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर (मास्टर्स) और पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। 40% या उससे अधिक दिव्यांगता और ₹6 लाख तक वार्षिक पारिवारिक आय वाले पात्र छात्र इसके लिए ऑफ़लाइन आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को उनके अध्ययन की अवधि के दौरान शैक्षणिक, निर्वाह और आकस्मिक भत्ते दिए जाते हैं।
एक नज़र में
| मंत्रालय / विभाग | Ministry Of Social Justice and Empowerment |
| स्तर | केंद्र सरकार |
| आयु | 35 वर्ष तक |
| आय सीमा | ₹6 lakh |
| आवेदन का तरीका | ऑफलाइन |
लाभ
- मास्टर्स डिग्री पाठ्यक्रम के लिए अधिकतम 3 वर्ष या पाठ्यक्रम समाप्ति तक वित्तीय सहायता दी जाती है।
- पीएचडी शोध के लिए अधिकतम 4 वर्ष या शोध समाप्ति तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
- निर्वाह भत्ता छमाही आधार पर मिलता है, जिसमें प्रथम छह माह का अग्रिम और आगे का भुगतान संतोषजनक प्रगति रिपोर्ट पर निर्भर होता है।
- पुस्तकों, आवश्यक उपकरणों, अध्ययन दौरों, सम्मेलनों में भाग लेने और शोध प्रबंध की टाइपिंग व बाइंडिंग के लिए आकस्मिक भत्ता मिलता है।
- प्रति वर्ष 2,400 अमेरिकी डॉलर (या यूके में 1,560 ब्रिटिश पाउंड) तक शोध या शिक्षण सहायक पद के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने की अनुमति है।
- कुल उपलब्ध सीटों में से 30% सीटें महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित हैं।
कौन आवेदन कर सकता है (पात्रता)
- आवेदक का नियमित और पूर्णकालिक विद्यार्थी होना अनिवार्य है।
- आवेदक के पास विदेश के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में मास्टर्स या पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश या बिना शर्त प्रवेश प्रस्ताव (अनकंडीशनल ऑफर) होना चाहिए।
- आवेदक की दिव्यांगता आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 2016 के तहत 40% या उससे अधिक होनी चाहिए।
- विज्ञापन माह के प्रथम दिन आवेदक की आयु 35 वर्ष या उससे कम होनी चाहिए।
- आवेदक के परिवार की कुल वार्षिक आय सभी स्रोतों को मिलाकर ₹6,00,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
जरूरी दस्तावेज
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी 40% या अधिक का वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र।
- विदेश के मान्यता प्राप्त संस्थान से प्राप्त बिना शर्त प्रवेश पत्र (ऑफर लेटर)।
- आयु और जन्म तिथि का वैध प्रमाण पत्र।
- पारिवारिक आय प्रमाण पत्र (वार्षिक आय ₹6 लाख से कम दर्शाने वाला)।
- पिछली शैक्षणिक योग्यता और डिग्री के प्रमाण पत्र।
आवेदन कैसे करें
- 1दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञापन और आवेदन पत्र प्राप्त करें।
- 2आवेदन पत्र में अपनी व्यक्तिगत, शैक्षणिक और दिव्यांगता संबंधी सभी जानकारियां भरें।
- 3विदेशी संस्थान से मिले प्रवेश पत्र और अन्य सभी आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां आवेदन के साथ संलग्न करें।
- 4विज्ञापन में दिए गए पते पर निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पूर्ण आवेदन पत्र ऑफ़लाइन जमा करें।
- 5पोर्टल पर चयनित उम्मीदवारों की सूची देखें अथवा अपने पंजीकृत ईमेल और संदेश के माध्यम से परिणाम की जानकारी प्राप्त करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस योजना के तहत प्रति वर्ष कुल कितने छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है?+
प्रत्येक चयन वर्ष में बजट की उपलब्धता के अनुसार कुल 20 नए विद्यार्थियों को यह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
क्या इस छात्रवृत्ति में महिला विद्यार्थियों के लिए कोई आरक्षण है?+
हाँ, प्रति वर्ष कुल सीटों में से 30% सीटें महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं।
छात्रवृत्ति अधिकतम कितने समय के लिए दी जाती है?+
यह सहायता मास्टर्स डिग्री के लिए अधिकतम 3 वर्ष और पीएचडी के लिए अधिकतम 4 वर्ष या पाठ्यक्रम पूरा होने तक दी जाती है।
क्या स्नातक (बैचलर्स) स्तर के छात्र इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं?+
नहीं, किसी भी विषय में स्नातक (बैचलर्स) स्तर के पाठ्यक्रमों के लिए यह छात्रवृत्ति देय नहीं है।
योजना के लिए अधिकतम पारिवारिक आय सीमा क्या है?+
आवेदक के परिवार की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय ₹6 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
क्या विदेश में पढ़ाई के दौरान रिसर्च असिस्टेंट के रूप में काम किया जा सकता है?+
हाँ, छात्र प्रति वर्ष 2,400 डॉलर (या यूके में 1,560 पाउंड) तक रिसर्च या टीचिंग असिस्टेंटशिप के माध्यम से कमा सकते हैं।
यदि मेरे पास पहले से मास्टर्स डिग्री है, तो क्या मैं दूसरी मास्टर्स के लिए आवेदन कर सकता हूँ?+
नहीं, जिस स्तर (मास्टर्स या पीएचडी) की उपाधि आवेदक भारत या विदेश से पहले ही ले चुका है, उसी स्तर के लिए पुनः छात्रवृत्ति नहीं दी जाती।
NaukriZila सरकारी वेबसाइट नहीं है। केवल आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करें; सरकारी योजना के लिए किसी को पैसे न दें। स्रोत: myScheme (Government of India)