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राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत विपणन प्रोत्साहन योजना

आधिकारिक myScheme रिकॉर्ड से जांचा गया Read in English

संक्षेप में

हथकरघा विपणन सहायता के तहत यह योजना पिछले 3 वर्षों की औसत हथकरघा बिक्री पर 10% विपणन प्रोत्साहन प्रदान करती है। यह वित्तीय सहायता हथकरघा निगमों, प्राथमिक बुनकर समितियों और उनके सदस्य बुनकरों को सीधे बैंक खाते में दी जाती है। पात्र संस्थाएं राज्य सरकार की अनुशंसा या सीधे राष्ट्रीय स्तर पर ऑफलाइन आवेदन कर सकती हैं।

एक नज़र में

मंत्रालय / विभागMinistry Of Textiles
स्तरकेंद्र सरकार
आवेदन का तरीकाऑफलाइन

लाभ

  • पिछले 3 वर्षों की औसत बिक्री का 10 प्रतिशत विपणन प्रोत्साहन के रूप में देय।
  • राज्य स्तरीय संगठनों के लिए केंद्र सरकार का अधिकतम अंश ₹1,00,00,000 तक।
  • प्राथमिक बुनकर सहकारी समितियों और अन्य स्थानीय संस्थाओं के लिए केंद्र सरकार का अधिकतम अंश ₹15,00,000 तक।
  • सामान्य मामलों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच 50:50 के अनुपात में वित्तीय व्यय साझाकरण।
  • राष्ट्रीय स्तर के हथकरघा संगठनों के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता भारत सरकार द्वारा वहन।
  • प्राप्त प्रोत्साहन राशि का 50 प्रतिशत संगठन को और 50 प्रतिशत सदस्य बुनकरों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) द्वारा वितरण।
  • 5 वर्ष की योजना अवधि में अधिकतम 3 वर्षों के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने की सुविधा।
  • नोडल एजेंसी द्वारा राशि प्राप्ति के 7 दिनों के भीतर पात्र एजेंसियों और बुनकरों को भुगतान अनिवार्य।

कौन आवेदन कर सकता है (पात्रता)

  • आवेदक राज्य हथकरघा निगम, शीर्ष सहकारी समिति, राष्ट्रीय संगठन, प्राथमिक बुनकर सहकारी समिति, उत्पादक कंपनी, स्वयं सहायता समूह अथवा फेडरेशन होना चाहिए।
  • संस्था द्वारा हथकरघा उत्पाद की अंतिम बिक्री सीधे उपभोक्ता को की गई होनी चाहिए।
  • बिक्री किए गए उत्पादों पर हथकरघा मार्क (हैंडलूम मार्क) या इंडिया हैंडलूम ब्रांड का उपयोग अनिवार्य है।
  • आवेदक के पास पिछले 3 वर्षों का प्रमाणित हथकरघा बिक्री टर्नओवर होना चाहिए।

जरूरी दस्तावेज

  • हथकरघा उत्पादों के जीएसटी अनुपालक बिक्री बिल और इनवॉइस।
  • जीएसटी अनुपालक सूत (यार्न) खरीद बिल।
  • पिछले 3 वर्षों का औसत बिक्री टर्नओवर विवरण।
  • हैंडलूम मार्क या इंडिया हैंडलूम ब्रांड के उपयोग का प्रमाण।
  • उपभोक्ताओं को अंतिम उत्पाद बिक्री का प्रमाण।
  • निर्धारित प्रपत्र में पूर्ण आवेदन (अनुलग्नक - बी8)।
  • राज्य स्तरीय परियोजना समिति की अनुशंसा और राज्य अंश स्वीकृति आदेश (राज्य स्तरीय प्रक्रियाओं हेतु)।

आवेदन कैसे करें

  1. 1चरण 1: पिछले 3 वर्षों के जीएसटी अनुपालक बिक्री बिल, सूत खरीद रसीदें और टर्नओवर आंकड़े एकत्रित करें।
  2. 2चरण 2: निर्धारित आवेदन पत्र (अनुलग्नक - बी8) को सही विवरणों के साथ भरें।
  3. 3चरण 3: प्राथमिक और राज्य स्तरीय संस्थाएं अपने आवेदन संबंधित राज्य सरकार के हथकरघा विभाग में जमा करें।
  4. 4चरण 4: राज्य सरकार दावों का सत्यापन करेगी और राज्य स्तरीय परियोजना समिति से अनुमोदन प्राप्त करेगी।
  5. 5चरण 5: राज्य सरकार समेकित प्रस्ताव को विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय को प्रेषित करेगी।
  6. 6चरण 6: राष्ट्रीय स्तर के हथकरघा संगठन अपने दावे सीधे विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय को भेज सकते हैं।
  7. 7चरण 7: अनुमोदन के पश्चात नोडल एजेंसी 7 दिनों के भीतर डीबीटी के माध्यम से राशि संस्था और बुनकरों के खातों में हस्तांतरित करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विपणन प्रोत्साहन राशि की गणना कैसे की जाती है?+

प्रोत्साहन की गणना पिछले 3 वर्षों की हथकरघा उत्पादों की औसत बिक्री के 10 प्रतिशत के आधार पर की जाती है।

इस योजना के तहत अधिकतम कितनी सहायता मिल सकती है?+

राज्य स्तरीय संगठनों को केंद्रीय अंश के रूप में अधिकतम ₹1 करोड़ और प्राथमिक समितियों को अधिकतम ₹15 लाख तक मिल सकते हैं।

क्या यह राशि केवल संस्था को मिलती है या बुनकरों को भी?+

10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा संस्था को और शेष 50 प्रतिशत हिस्सा सदस्य बुनकरों के बैंक खातों में डीबीटी द्वारा दिया जाता है।

एक संस्था कितने वर्षों तक यह लाभ ले सकती है?+

यह विपणन प्रोत्साहन 5 वर्षों की योजना अवधि के दौरान अधिकतम 3 वर्षों के लिए प्राप्त किया जा सकता है।

क्या एक समिति द्वारा दूसरी समिति को की गई बिक्री पर लाभ मिलेगा?+

नहीं, एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी, सरकार को की गई बिक्री या वस्तु-विनिमय (बार्टर) के तहत की गई बिक्री इस योजना में मान्य नहीं है।

क्या हैंडलूम मार्क होना अनिवार्य है?+

हाँ, प्रोत्साहन का दावा करने के लिए बेचे गए हथकरघा उत्पादों पर हैंडलूम मार्क या इंडिया हैंडलूम ब्रांड होना अनिवार्य है।

NaukriZila सरकारी वेबसाइट नहीं है। केवल आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करें; सरकारी योजना के लिए किसी को पैसे न दें। स्रोत: myScheme (Government of India)