भेषज कृषि विकास योजना 2026
आधिकारिक myScheme रिकॉर्ड से जांचा गया Read in English
संक्षेप में
भेषज कृषि विकास योजना उत्तराखंड के बेरोजगार नागरिकों को कम से कम पांच नाली भूमि पर जड़ी-बूटी और औषधीय पौधों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करती है। चयनित किसानों को पौधे, प्रशिक्षण और बाजार में बिक्री हेतु निःशुल्क चालान दिया जाता है, जिससे प्रति नाली ₹1,200 तक का वार्षिक लाभ मिल सकता है। इसमें आवेदन और चयन की प्रक्रिया जिला भेषज समन्वयक द्वारा ऑफलाइन क्लस्टर के आधार पर की जाती है।
एक नज़र में
| मंत्रालय / विभाग | Horticulture Department |
| स्तर | राज्य सरकार (Uttarakhand) |
| आवेदन का तरीका | ऑफलाइन |
लाभ
- कुठ की खेती से अनुमानित ₹1,000 प्रति नाली प्रति वर्ष का लाभ।
- कुटकी की खेती से अनुमानित ₹660 प्रति नाली प्रति वर्ष का लाभ।
- बड़ी इलायची से चौथे वर्ष से अनुमानित ₹1,120 प्रति नाली प्रति वर्ष का लाभ।
- सर्पगंधा की खेती से अनुमानित ₹1,200 प्रति नाली प्रति वर्ष का लाभ।
- तेजपात की खेती से दस वर्ष बाद अनुमानित ₹1,200 प्रति नाली प्रति वर्ष का लाभ।
- जुलाई-अगस्त (बरसात के मौसम) में पांच नाली मानक के अनुसार चुनिंदा नर्सरियों से पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं।
- रोपे गए पौधों का जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान, गोपेश्वर में पंजीकरण कराया जाता है।
- फसल तैयार होने से तीन महीने पहले बाजार या फार्मेसी में बिक्री हेतु निःशुल्क चालान की सुविधा।
कौन आवेदन कर सकता है (पात्रता)
- आवेदक उत्तराखंड राज्य का मूल निवासी होना चाहिए।
- आवेदक का बेरोजगार होना अनिवार्य है।
- आवेदक के पास खेती के लिए कम से कम पांच नाली भूमि उपलब्ध होनी चाहिए।
- आवेदक के पास आधार कार्ड होना चाहिए।
- जड़ी-बूटी उत्पादन के माध्यम से स्वरोजगार पाने में रुचि होनी चाहिए।
- दो से तीन गांवों के 10 किसानों के समूह (क्लस्टर) में कार्य करने हेतु तैयार होना चाहिए।
जरूरी दस्तावेज
- आधार कार्ड
- विभागीय आवश्यकतानुसार अन्य दस्तावेज
आवेदन कैसे करें
- 1संबंधित विकासखंड में जिला भेषज समन्वयक द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविर में भाग लें।
- 2दो से तीन गांवों के 10 किसानों का एक क्लस्टर बनाएं।
- 3क्लस्टर सूची में नाम दर्ज कराने हेतु आधार कार्ड और भूमि संबंधी विवरण जिला भेषज समन्वयक को दें।
- 4मुख्यालय की स्वीकृति के बाद जुलाई-अगस्त के दौरान चयनित नर्सरी से पौधे प्राप्त करें।
- 5जिला भेषज समन्वयक के माध्यम से रोपे गए पौधों का पंजीकरण गोपेश्वर संस्थान में करवाएं।
- 6उपज बेचने के लिए कटाई से तीन माह पूर्व जिला भेषज समन्वयक से निःशुल्क चालान प्राप्त करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भेषज कृषि विकास योजना के लिए न्यूनतम भूमि की क्या शर्त है?+
इस योजना में शामिल होने के लिए आवेदक के पास कम से कम पांच नाली भूमि होनी चाहिए।
इस योजना के तहत किन औषधीय पौधों की खेती कराई जाती है?+
योजना के अंतर्गत कुठ, कुटकी, बड़ी इलायची, सर्पगंधा और तेजपात की खेती कराई जाती है।
औषधीय फसलों से प्रति नाली कितना अनुमानित लाभ मिल सकता है?+
प्रति नाली वार्षिक लाभ: कुठ से ₹1,000, कुटकी से ₹660, बड़ी इलायची से ₹1,120 (चौथे वर्ष से), सर्पगंधा से ₹1,200 तथा तेजपात से ₹1,200 (10 वर्ष बाद) अनुमानित है।
लाभार्थियों का चयन किसके द्वारा किया जाता है?+
जिला भेषज समन्वयक द्वारा विकासखंडों में प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से क्लस्टर बनाकर चयन किया जाता है।
किसानों को पौधे कब दिए जाते हैं?+
पौधे वर्षा ऋतु में जुलाई और अगस्त माह के दौरान निर्धारित नर्सरियों से दिए जाते हैं।
उपज की बिक्री के लिए क्या सहायता दी जाती है?+
फसल तैयार होने से तीन महीने पूर्व जिला भेषज समन्वयक द्वारा मंडी या फार्मेसी में बिक्री हेतु निःशुल्क चालान जारी किया जाता है।
NaukriZila सरकारी वेबसाइट नहीं है। केवल आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करें; सरकारी योजना के लिए किसी को पैसे न दें। स्रोत: myScheme (Government of India)